उत्तराखंड के जंगलो में भीषण आग - हर तरफ धुआँ ही धुआँ

उत्तराखंड के जंगलो में भीषण आग - हर तरफ धुआँ ही धुआँ: एक बार फिर उत्तराखंड के जंगलो में भीषण आग का कहर जारी है।  वनाग्नि से जहाँ कई हैक्टेयर वन संपदा जल कर खत्म हो चुकी है। वहीं जंगलों की घास भी जल रही है जिससे छोटे जानवरों तथा पक्षियों को सीधा नुकसान पहुंच रहा है। पक्षियों के घोंसले तथा उनके अंडे भी खत्म हो रहे है।वनाग्नि से बचते जानवर भोजन की तलाश में मानव आबादी की तरफ रुख कर सकते हैं और मानव वन जीवों के बीच संघर्ष बढ़ सकता है। इस आग में जंगलों की वनस्पतियों को भी व्यापक नुकसान हुआ है।


जैव विविधता समाप्त हो रही है चीड़ बांज के साथ साथ काफल, किलमोड़ा, पत्थरचट्टा, हिमालु, देवदार, एबीज, पेयोनिंग, एकोलिप्टिस, शीशम हल्दू जामुन इत्यादि जैसे पेड़ नष्ट हो रहे हैं, वातावरण भी दूषित हो रहा है। कार्बन की मात्रा बढ़ रही है और प्रदूषक गैसों का उत्पादन बढ़ा है। तापक्रम में भी वृद्धि हुई है। उत्तराखंड में 4700 आवृतबीजी पौधों की प्रजातियां है जिसमे से 701 औषधीय पौधे है। 

हिमालयी क्षेत्र में 1700 जैव विविधता की प्रजातियां है। वातावरण में बढ़ने से भूमि को भी नुकसान पहुंचा है। जल नजूल भी प्रभावित हो रहा है।खुर्पाताल और ठंडी सड़क में लगी आग ये साबित करती है। आग पर तुरंत काबू करने के लिए हैलीकॉप्टर द्वारा आग बुझाने का कार्य शुरू होना चाहिए।


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