उत्तराखंड: लॉकडाउन में शहरो से पहाड़ लौटे 70 हजार लोग, अब यहीं रुक जाना चाहते हैं


उत्तराखंड / बागेश्वर : कोरोना महामारी के चलते इस लॉकडाउन से भले ही किसी को फायदा हुआ हो या ना हुआ हो मगर उत्तराखंड के सूने पड़े हुए गांवों की चहल-पहल अब वापस लौट आई है। यह लॉकडाउन पहाड़ों पर वरदान बनकर आया है।

उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या इस समय पलायन है। लोगों ने रोजगार के कारण गांव को छोड़कर शहर की ओर रुख कर लिया है और गांव सूने पड़े हुए हैं। मगर लॉकडाउन के बाद शहरों से कई प्रवासियों ने गांव की और आकर रिवर्स पलायन किया है।

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आपको बता दें कि लॉकडाउन के बाद उत्तराखंड के 10 जिलों में तकरीबन 70000 (अनुमानित) लोग अपने गांव की ओर लौट चुके हैं। सबसे ज्यादा प्रवासी पौड़ी, टिहरी,चंपावत,अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में लौटे हैं। इसमें 30 फ़ीसदी लोग ऐसे हैं जिन्होंने उत्तराखंड के शहरों में ही प्रवास किया हुआ था। 65 फ़ीसदी ऐसे लोग हैं जिन्होंने देश के विभिन्न राज्य में प्रवास किया था और 5 फ़ीसदी विदेश से अपने गांव लौटे हैं।

अगर हम राज्य पलायन आयोग के आंकड़ों की बात करें तो इनमें से 30 फ़ीसदी लोगों ने लॉक डाउन के बाद और स्थिति सामान्य होने के बाद भी अपने गांव में रुकने की इच्छा जताई है जो कि एक अच्छी खबर है। आपको बता दें कि रिवर्स माइग्रेशन त्रिवेंद्र सिंह रावत की हमेशा प्राथमिकता रही है और लॉकडॉन के दौरान ऐसा संभव हो पा रहा है जिसके बाद मुख्यमंत्री से आशा की जा रही है कि वह गांव में रुकने वाले सभी प्रवासियों के लिए रोजगार की व्यवस्था करेंगे।

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पलायन आयोग ने गांव में रुकने के इच्छुक लोगों के लिए आर्थिक पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उनके लिए कुछ कदम उठाने के लिए सरकार को सुझाव दिया है। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ एसएस नेगी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात करी और उनको बताया कि रिवर्स पलायन के बाद प्रवासियों के आर्थिक पुनर्वास के लिए अभियान चलाने की बहुत ज्यादा जरूरत है।
source:rajya_samiksha

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